Tuesday, 15 June 2021

योग दिवस पर कविताएँ | Poem on Yoga Day in Hindi

दोस्तों, आपने तो ये अवश्य ही सुना होगा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। आप और हम सभी यही चाहते है कि हमारा स्वास्थ्य उत्तम हो, जिससे हम सुंदर और स्वस्थ दिखें। लेकिन क्या आप जानते है दोस्तों, अच्छा स्वास्थ्य कोई ईश्वर की देन नही है। ईश्वर तो हमको जीवन देता है और इस जीवन का ध्यान और अपने तन-मन का ध्यान हमें स्वयं ही रखना पड़ता है। दोस्तों, आजकल की भागदौड़ और प्रदुषण से भरी जिंदगी में अच्छा स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। लोग इतने व्यस्त रहते है कि स्वयं के स्वास्थ्य पर ध्यान ही नही दे पाते। लेकिन ऐसा करना उचित नही है। हमारा जीवन अच्छे स्वास्थ्य पर निर्भर है और इसका हमें ख्याल रखना पड़ेगा। अब ये बात खड़ी होती है कि कम समय में अपने स्वास्थ्य का ख्याल कैसे रखा जाए, तो दोस्तों उसके लिए हमें कोई कठिन तपस्या नही करनी है। इसके लिए सिर्फ हमें प्राचीन काल से चली आई योग पद्धति को अपनाना है जिसके बल पर कितने ऋषि-मुनि हजारों सालों तक जीवन व्यतीत करते थे और स्वस्थ रहते थे।

दोस्तों, आप सबके अच्छे स्वास्थ्य के लिए हम आपको योग के लिए प्रेरित करते हुए आपके समक्ष साझा करते है कुछ योग दिवस पर कविताएँ। हमें आशा है कि ये कविताएँ आपको अच्छी लगेंगी और आपकी प्रसन्नता में वृध्दि करेंगी।

योग दिवस पर कविताएँ | Poem on Yoga Day in Hindi


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Poem on Yoga Day in Hindi

Poem on Yoga in Hindi


'योग' जीवन में

अगर अपने जीवन को,
बनाना है निरोग,
तो तन और मन दोनों से,
अपनाना होगा योग।

तामसिक आहारों को छोड़कर,
भोजन में लाये सात्विकता,
भोगी प्रवित्ति को त्यागकर,
योगी की अपनायें मानसिकता।

भागदौड़ के जीवन में,
आराम बहुत है जरूरी,
योग से नाता जोड़ा अगर आपने,
तो होगी हर कमी पूरी।

योग आपके जीवन में,
है करता ऊर्जा का संचार,
स्वस्थ शरीर के साथ-साथ,
देता मस्तिष्क में उत्तम विचार।

योग को जीवन में लाइए,
दूर रहेगा हर वियोग,
तभी बनेगा जीवन उत्तम,
और बनेगा हर्ष और आनंद का संजोग।
- Nidhi Agarwal

योग दिवस पर कविताएँ


योग को अपनाए...

आओं हम सब मिलकर,
योग को अपनाएं,
अपने बहुमूल्य जीवन को 
दीर्घायु बनाएं।

योग हमारे जीवन से
रोगों को दूर भगाता है,
देकर स्वस्थ तन मन हमको,
हमको निरोग बनाता है।

निरोग बने और स्वस्थ रहे,
ये सबको हम बतलाएँ,
अपने बहुमूल्य जीवन को,
दीर्घायु बनाएं।

आओं हम सब मिलकर...
योग को अपनाएं...

अपने स्वास्थ्य का हमको तो,
स्वयं ही ध्यान रखना होगा,
हष्ट-पुष्ट बने जिससे तन-मन,
वो खान-पान अपनाना होगा।

स्वास्थ्य से बड़ा नही कोई धन है,
सबको ये बतलाएँ,
अपने बहुमूल्य जीवन को,
दीर्घायु बनाएं।

आओं हम सब मिलकर...
योग को अपनाए...

योग को जीवन में लाने का,
अभियान सफ़ल तब ही होगा,
एक साथ मिलकर जब,
योग को अपनाने का जतन होगा।

हर मानव के हृदय आओ,
योग के लिए आस्था जगाएँ,
अपने बहुमूल्य जीवन को,
दीर्घायु बनाएं।

आओं हम सब मिलकर...
योग को अपनाएं...
- निधि अग्रवाल

Yoga Par Kavita


योग है

योग कर्म है, 
योग धर्म है ,
ऋषियों-मुनियों के निरोग जीवन का,
योग ही तो एक मर्म है।

योग यत्न है,
योग प्रयत्न है,
जिसने योग को अपनाया,
हुआ उसी का सफ़ल जीवन है।

योग शक्ति है,
योग विरक्ति है,
जोड़े मन-मस्तिष्क से ईश से जो हमको,
ये पूजा, प्रेम और भक्ति है।

योग गूढ़ है,
योग पूर्ण है,
अनादिकाल से है अस्तित्व जिसका,
योग ही ब्रह्मांड सम्पूर्ण है।
- Nidhi Agarwal

दोस्तों, हमें योग को जीवन में अपनाना होगा, क्योंकि 'योग ही रोग के नाश का साधन है'। अगर आप अपने व्यस्त जीवन में निसदिन आधे घंटे भी योग को स्थान देंगे तो आप तन और मन दोनों से स्वस्थ रहेंगे, और हाँ दोस्तों आप स्वस्थ रहेंगे तो प्रसन्न भी रहेंगे। दोस्तों हमारे जीवन में हमें और क्या चाहिए, प्रसन्नता ही न, और ये प्रसन्नता तो हमारे अच्छे स्वास्थ्य पर ही निर्भर करती है। तो आइए दोस्तों आज से प्रण लीजिए कि आप अपने जीवन में योग को अपनायेंगे और स्वस्थ रहेंगे।

हमें आशा है कि आपको यह Poem on Yoga Day in Hindi अवश्य पसंद आयी होगी, यदि अच्छी लगी हो तो इन्हें साझा अवश्य करिये ताकि और लोग भी हमारे माध्यम से योग का महत्त्व समझ, इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाए।

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