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Wednesday, 15 May 2019

हिंदी कहानियों पर कविताएँ | Collection of Hindi Poems Based on Stories

आप सभी ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी से कहानियाँ तो सुनी होंगी। उनमें से कई कहानियाँ याद भी होंगी। कई कहानियाँ का दृश्य आज भी आपके सामने आ ही जाता होगा। इन कहानियों से कोई न कोई सीख तो जरूर ही मिल जाती थी। जंगल के राजा शेर और चूहे की कहानी, कछुआ और खरगोश की कहानी, किसान और चार बेटों की कहानी, जैसी कई अन्य कहानियाँ है, जिनसे कुछ न कुछ सीख मिलती जरूर है।

आप सबने इन पर कहानियाँ तो सुनी है, परन्तु आज हम आपके समक्ष इन पर कविताएँ प्रस्तुत करने का प्रयत्न करेंगे। आज हम आपके समक्ष शेयर करेंगे कुछ Collection of Hindi Poems Based on Stories, मुझे आशा है कि आपको यह कहानियों पर आधारित कविताएँ जरूर पसंद आएंगी।

हिंदी कहानियों पर कविताएँ | Collection of Hindi Poems Based on Stories


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Hindi Poems Based on Stories

Hindi Poems on Stories | जंगल के राजा शेर और चूहे पर कविता


जंगल का राजा शेर और चूहा

एक दिन जंगल के राजा को,
नींद बहुत थी आई।
सो गया एक पेड़ के नीचे वो,
लेते-लेते जंभाई।

उसी समय एक छोटा चूहा,
लगा वहां पर डोलने।
जंगल के राजा के ऊपर,
लगा था वो खेलने।

इतने में जंगल के राजा की,
निंद्रा थी जा टूटी।
लगा गरजने क्रोध में वो,
किस्मत आज है किसकी फूटी।

चूहे राजा डर के मारे,
हाथ जोड़कर बोला।
हो गयी खता मुझसे,
मैं हूँ बड़ा ही भोला।

मुझे न तुम अब खाओ,
जान बख्श दो मेरी।
काम तुम्हारे आऊँगा,
जब जरूरत होगी मेरी।

जंगल के राजा को भी,
कुछ बात समझ में आई।
बात मान कर चूहे की,
उससे थी प्रीत बढ़ाई।

एक दिन शिकारी ने,
जंगल में जाल बिछाया।
शिकारी के जाल में फंसकर,
शेर बहुत घबराया।

फिर उसको अपने मित्र,
चूहे की याद सताई।
मदद मांगने के खातिर चूहे से,
उसने गुहार लगाई।

छोटा मूसक राजा भी,
झट-पट दौड़ा-दौड़ा आया।
जाल काटकर जल्दी से,
अपने मित्र को बचाया।

फिर तो जंगल के राजा ने,
चूहे को गले लगाया।
देकर शाबाशी उसको,
दोस्ती का मान बढ़ाया।

देख मित्रता दोनों की,
सबको समझ में आया।
सच्चा मित्र वही होता है,
जो मुसीबत में है काम आया।
---Written By- Nidhi Agarwal

Story telling poems in Hindi | बिल्ली-बिल्ला और बन्दर पर कविता


बिल्ली-बिल्ला और चतुर बन्दर

एक दिन बिल्ली रानी की,
बिल्ले से हुई लड़ाई।
रोटी के खातिर दोनों ने,
एक दूजे की करी पिटाई।

मेरी-मेरी कहकर दोनों ने,
आपस में होड़ लगाई।
बिल्ली बोली मैं लूँगी,
बिल्ले ने भी अपनी रट लगाई।

इतने में एक बंदर राजा,
उधर कही से आए।
बोले क्या माज़रा है,
चलो आज निपटाए।

बिल्ली और बिल्ला बोले,
एक रोटी है हमने पाई।
उसके लिए हम दोनों में,
हुई बहुत लड़ाई।

बंदर बोला ठहरो तुम,
कोई जतन मैं करता हूँ।
लड़ो न तुम आपस में दोनों,
रोटी के दो टुकड़े करता हूँ।

बंदर ने रोटी को,
दो भागों में बांटा।
चतुराई करके उसने,
एक बड़ी, दूजी छोटे टुकड़े में काटा।

बंदर बोला दोनों से,
गलती हो गयी फिर से।
टुकड़ो की मात्रा में देखो,
है बात वही आन पड़ी फिर से।

बोला वो रुको,
तुरंत अभी मैं आता हूँ।
संग अपने एक छोटा सा,
तराजू लेके आता हूँ।

बंदर झट से अपने घर से,
तराजू लेकर आया।
रोटी को तराजू में रख कर,
अपना ध्यान लगाया।

फिर से बोला नटखट बंदर,
बिल्ली और बिल्ले से।
एक तरफ जाएदा है टुकड़ा,
क्या मैं खा लू उसमे से।

ऐसे कर-कर के बंदर ने,
सारी रोटी खा ली।
बिल्ला-बिल्ली यूँ खड़े होकर,
बस मुँह रहे ताकते।

अंत समय में दोनों को
एक बात समझ में आई।
पूरी-पूरी करते करते,
आधी भी न पायी।

क्योंकि लालच बुरी बला है,
इसमें सब फसते है।
जो कभी न करते लालच,
वो जीवन भर हँसते हैं।
---Written By- Nidhi Agarwal

Hindi Poems Based on Stories | किसान और चार बेटों पर कविता


किसान और उसके चार आलसी बेटे

एक किसान के थें बेटे चार,
करते थे दिन भर व्यभिचार।
छोड़ छाड़ कर अपना काम,
करते थे दिन भर आराम।

आपस में उनकी न बनती
करते थे हर दम लड़ाई।
दशा देखकर बेटों की,
हो गया था किसान का
जीवन भी दुःखदायीं।

किसान बेचारा था,
किस्मत का मारा।
दिन भर बच्चों की चिंता में,
तपता रहता था बेचारा।

एक दिन एक उपाय,
एकाचित उसके मन में आया।
अपने चारों बेटों को,
उसने तुरंत बुलाया।

देकर एक-एक लकड़ी के टुकड़ों को,
करने को बोला टुकड़े चार,
पल भर में टुकड़ों का,
लग गया वहां अम्बार।

फिर किसान ने सबको एक-एक,
लकड़ी का गठ्ठर पकड़ाया।
कहा तोड़ कर दिखलाओ मुझको,
जैसे एक-एक को तोड़ दिखाया।

कोई तोड़ सका नही जब,
तब किसान ने इसका राज बताया।
एकता में बल होता है,
फिर सबको समझ में आया।
---Written By- Nidhi Agarwal

Hindi Poems on True Story | कछुआ और खरगोश पर कविता


कछुआ और घमण्डी खरगोश

एक खरगोश घमण्ड करता था,
अपनी ताकत पर हरदम।
रोज सभी से रेस लड़ाता फिरता,
करता सबको तंग हरदम।

एक दिन उसने एक कछुए संग,
मिलकर रेस लगाई।
तेज दौड़ता भागा वो,
करके अपनी चतुराई।

आगे पहुँच जब पीछे मुड़कर,
उसने टुकुर-टुकुर देखा।
सोचा धीमा कछुआ तो बस,
सांसे गिनता होगा।

उसने सोचा फिर क्यों न कर लूं,
थोड़ा मैं आराम।
थोड़ी सी थकान मिटाकर,
करता हूँ फिर अपना काम।

करते-करते आराम,
खरगोश की लग गयी आँख।
सो गया वो गहरी नींद में,
भूलकर सारी बात।

बेचारा कछुआ तो रहा,
धीरे-धीरे चलते।
पहुँच गया वो मंजिल तक,
सांझ ढलते-ढलते।

नींद खुली खरगोश की जब,
जल्दी से वो भागा।
जीत हुई कछुए की देखकर,
सच में था वो जागा।

हाल देखकर अपना वो,
किस्मत पर अपनी रोया।
आलस और घमंड में बहकर,
उसने था सब कुछ खोया।

कहानी सुनकर ये हमको,
सीख समझ में आई।
जीत उसी की होती है,
जो करता नही ढिठाई।

निरंतर प्रयास से हम,
ऊंचे बढ़ते जाते है।
मंजिल उनको ही मिलती है,
जो हरदम कदम बढ़ाते हैं।
---Written By- Nidhi Agarwal

हमें आशा है कि आपको यह कहानियों पर आधारित कविताएँ जरूर पसंद आयी होगी। आपको यह कविताएँ कैसी लगी और अपने सुझाव हमें कमेंट के माध्यम से जरूर शेयर करें। हमें उम्मीद है कि इन कविताओं के जरिये आपको कोई न कोई सीख जरूर मिली होगी। यदि आपको यह कविताएँ अच्छी लगी हो तो इन्हें शेयर भी कर दीजिये।

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Edited By- Somil Agarwal

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