Saturday, 19 September 2020

महिला सशक्तिकरण पर कविताएँ | Poem on Women Empowerment in Hindi

महिलाओं को सशक्त बनाना महिला सशक्तिकरण कहलाता है, आसान शब्दों में कहा जाए तो भौतिक, आध्यात्मिक, शारीरिक व मानसिक, सभी स्तर पर महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रक्रिया महिला सशक्तिकरण कहलाती है। महिलाओं को पुरुष के सामान अधिकार मिले, उनको स्वतंत्रता व सम्मान मिले और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए जैसे कई अहम मुद्दे है जिसके सफल स्वरूप महिला सशक्त बन सकती है। यही आवश्यकताओं और मुद्दों को जब पुरुष व समाज समझेगा व प्राथमिकता देगा तभी हमारे देश की महिलाएँ सशक्त बन सकेंगी और देश का नव निर्माण करेंगी।

आज हम आपके समक्ष शेयर करते है कुछ महिला सशक्तिकरण पर कविताएँ, यह कविताएँ हमने बहुत ही सरल भाषा उपयोग कर आपके समक्ष प्रस्तुत की है ताकि पुरुष व समाज में महिलाओं के प्रति सभ्य भावना जागृत हो सके और महिलाएँ सशक्त बन सकें।

महिला सशक्तिकरण पर कविताएँ | Poem on Women Empowerment in Hindi


Poem on Women Empowerment in Hindi, महिला सशक्तिकरण पर कविताएँ, Mahila Sashaktikaran Par Kavita
Poem on Women Empowerment in Hindi

Poem on Women Empowerment in Hindi


महिला सशक्तिकरण

महिला शक्तिकरण जरूरी है,
वर्तमान युग में,
एक सुदृढ़ समाज के लिए।

जरूरी है महिलाओं को,
शिक्षा की ओर अग्रसर करना,
उनके स्वयं के अधिकारों के ज्ञान के लिए।

जरूरी है महिलाओं की,
स्वतंत्रता और उनका सम्मान,
समाज में एक नई पहचान के लिए।

जरूरी है महिलाओं को,
हर एक क्षेत्र में अवसरों को प्रदान करना,
एक नवनिर्माण के लिए।

जरूरी है महिलाओं के,
विचारों को महत्त्व देना और समझना,
उनकी भावनाओं के मान के लिए।

जरूरी है महिलाओं की,
आवश्यकताओं का ध्यान रखना,
उनके उत्तम स्वाथ्य के लिए।

जरूरी है महिलाओं को,
सक्षम और शक्तिशाली बनाना,
उन्हें स्वयं की सुरक्षा में सुदृढ़ करने के लिए।
- निधि अग्रवाल

महिला सशक्तिकरण पर कविता


ऐ नारी !

इस पुरुष प्रधान समाज में ऐ नारी !
पाने को अपने अधिकार,
स्वयं ही जतन से तुमको,
स्वयं के लिए लड़ना होगा।

तुफानो में भी तुमको,
अपनी राह बनानी होगी,
त्याग बंधनों को तुमको,
आगे कदम बढ़ना होगा।

अपनी ममतामयी छवि छोड़कर,
गुलामी की जंजीर तोड़ कर,
लेकर रणचंडी का रूप,
स्वयं पर अत्याचार को दबाना होगा।

अपने ही अस्तित्व के लिए तुमको,
देना होगा स्वयं को एक नया अवतार,
बहुत बन चुकी तुम बेचारी,
अब तुमको काली बन जाना होगा।

देने को स्वयं को एक नही पहचान,
और पाने को कामियाबी का आसमान,
पंख लगाकर सपनों के,
अब तुमको उड़ जाना होगा।

बनना होगा तुमको शक्तिशाली,
रखने को अपना मान और सम्मान,
गौरवशाली जीवन जीने के लिए,
स्वयं ही बदल जाना होगा।
- Nidhi Agarwal

Mahila Sashaktikaran Par Kavita


नारी क्यों बन गयी है बेचारी

नारी क्यों बन गयी है बेचारी,
क्यों नही बनी वो अब तक,
पुरुष के समान ही अपने स्वप्नों की अधिकारी।

है वो जीवन दात्री,
जाने कितने दर्द है सहती,
फिर क्यों कोख में ही जाती है मारी।

करती पुरुष का वो जीवन गुलजार,
देकर उसको घर-संसार,
देती सबको खुशियाँ सारी।

करती रहती है हरदम वो त्याग,
अपनी इच्छाओं और भावनाओं का,
कहलाने को संस्कारी।

पूरा जीवन है समर्पण करती,
बिन लालसा के वो सारी,
करती पूरी अपनी जिम्मेदारी।

जरूरी नही क्या उसके जीवन में खुशियाँ,
और मिलना मान-सम्मान,
जिसकी थी वो अधिकारी।

नारी क्यों बन गयी है बेचारी
क्यों नही बनी वो अब तक,
पुरुष के समान ही अपने स्वप्नों की अधिकारी।
- निधि अग्रवाल

Women Empowerment Par Kavita


पूरा करना अब अपना ख्वाब

पूरा करना मुझको अब,
छोटा सा अपना ख्वाब,
माना मुश्किलें बेहिसाब है,
फिर भी मन में है विश्वास।
मिलेंगी वो सारी खुशियाँ मुझको,
जो मेरे लिए है खास।

नही बंधना मुझको,
रीति-रिवाजों की जंजीरों में।
लिखना है मुझको तो कामयाबी बस,
अपनी किस्मत की लकीरों में।
पंखों को फैलाकर अपने,
मुझे नापना पूरा अब आसमान।

पूरा करना मुझको अब,
छोटा सा अपना ख्वाब,
माना मुश्किलें बेहिसाब है,
फिर भी मन में है विश्वास।
मिलेंगी वो सारी खुशियाँ मुझको,
जो मेरे लिए है खास।

मुझको तो बस इतना है कहना,
अब और नही कुछ भी है सहना।
नही चाहिए मुझे कोई गहना,
मुझको तो बस अपने दम पर है रहना।
करके पूरे अपने सपने,
रचना एक नया इतिहास है।

पूरा करना मुझको अब,
छोटा सा अपना ख्वाब,
माना मुश्किलें बेहिसाब है,
फिर भी मन में है विश्वास।
मिलेंगी वो सारी खुशियाँ मुझको,
जो मेरे लिए है खास।

हर उस बेड़ी को तोड़कर,
हर परीक्षा को पार कर,
अपने हर डर का नाश कर
नई मंजिलो  से नाता जोड़कर
जीवन में अपने भरना उमंग और उल्लास है।

पूरा करना मुझको अब,
छोटा सा अपना ख्वाब,
माना मुश्किलें बेहिसाब है,
फिर भी मन में है विश्वास।
मिलेंगी वो सारी खुशियाँ मुझको,
जो मेरे लिए खास है।

क्यों मैं रहूँ सिर्फ घर तक सीमित
और चुकाऊँ अपने ख्वाबों की कीमत।
क्यों कहलाऊँ मैं अबला
जब अंदर मेरे बल है असीमित।
बनकर सबला अब तो मुझको
लेना अपना अधिकार है।

पूरा करना मुझको अब,
छोटा सा अपना ख्वाब,
माना मुश्किलें बेहिसाब है,
फिर भी मन में है विश्वास।
मिलेंगी वो सारी खुशियाँ मुझको,
जो मेरे लिए खास है।
- Nidhi Agarwal

हमें आशा है कि आपको यह Poem on Women Empowerment in Hindi जरूर पसंद आयी होगी। अगर यह कविताएँ अच्छी लगी हो तो इन्हें अपने मित्रों के साथ शेयर अवश्य करिए, ताकि लोग हमारी इन कविताओं के जरिये जागरूक हो सकें और महिलाएँ सशक्त बन सकें।

EDITED BY- Somil Agarwal

No comments:

Post a comment

Most Recently Published

दशहरा त्यौहार पर कविताएँ | Poem on Dussehra in Hindi

दोस्तों, हमारा देश भारत त्यौहारों का देश है। सभी त्यौहारों में दशहरे का त्यौहार पूरे हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। ये त्यौहार असत्य पर सत...