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Tuesday, 19 February 2019

Poem on Girl Child in Hindi | Save The Girl Child

बेटियाँ अनमोल होती है, और जो किस्मत वाले होते है, ईश्वर उन्ही को बेटी रूपी धन देते है। बेटियाँ तीन कुलों को सवांरती है। ये बेटियाँ ही भविष्य की नारियाँ है जो धरती पर जीवन का निर्माण करती है।
इतना कुछ होने के बावजूद भी हमारे समाज में इतनी कुरुतिया विद्यमान है कि लोग बेटी होने में खुशी नही मनाते है, उस नन्ही कली को खिलने ही नही देते है। जन्म से पहले ही उसका अस्तित्व खत्म कर देते है। अगर ऐसा इसी तरह होता रहा तो एक दिन इस धरती पर मनुष्य का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
आइए हम इस मानसिकता को बदले और समाज में परिवर्तन लाए जिससे धरती पर हमारा अस्तित्व बना रहे। बेटियों के प्रति अपनी मानसिकताओं को बदले जिससे यह नन्ही कलियाँ फूल बनकर खिल सके और आपके प्रेम के आंगन को अपनी कामयाबी से महका सके।
इसी मानसिकता को बदलने के लिए आज हम आपके समक्ष, Poem on Girl Child in Hindi प्रस्तुत करते है।

Poem on Girl Child in Hindi | Save The Girl Child


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Poem on Girl Child in Hindi

Poem on Girl Child in Hindi


नन्ही कलियाँ

नन्ही-नन्ही कलियाँ है हम,
जीवन की इस बगिया की।
छोटी-छोटी परियाँ है हम,
आसमान की दुनिया की।

मत तोड़ो डाली से हमको,
फूलों सा खिल जाने दो।
सुन्दर सी अपनी बगिया को,
खुशबू सा महकाने दो।

पंख लगाकर सपनों के,
आसमां में उड़ जाने दो।
रौशन होगी हमसे यह दुनिया,
अपना परचम लहराने दो।
Written By- Nidhi Agarwal

Poem on Save Girl Child in Hindi


तेरी कोख में पली

तेरी कोख में पली,
हिस्सा हूँ मैं तेरे वजूद का।
मत ऐसे अलग करो मुझे खुद से,
छीनो न स्वयं से पहचान अपनी।
बेटी हूँ माँ तेरी मैं,
और तू मेरी जनिनी।
किसी और से नही,
पर तुझसे कुछ उम्मीद है मुझे,
शायद निराश नही करोगी मुझे।
यूँ अंधेरे से संसार में,
अकेला न छोड़ोगी।
खिलने से पहले मुझ जैसे,
फूल को ना तोड़ोगी।
अपनी ममता से यूँ,
मुँह न मोड़ोगी।
मेरे लिए इस निर्दयी,
संसार से भी लड़ जाओगी।
देकर मुझे जीवन,
मेरी पहचान बन जाओगी।
Written by- Nidhi Agarwal

Save The Girl Child Poem in Hindi


मैं भी जीना चाहती हूँ

माँ, मैं भी जीना चाहती हूँ,
बस तेरी दुनिया में थोड़ा सा आसरा चाहती हूँ।

सुंदर से इस संसार को देखना चाहती हूँ,
तेरे आँचल की छांव में बड़ी होकर,
पापा की उंगली पकड़कर,
नन्हें-नन्हें पैरों से चलना चाहती हूँ।

जीवन की इस बगियाँ में,
फूल बनकर महकना चाहती हूँ।
बन छोटी सी चिड़िया तेरी,
पापा की गोदी में चहकना चाहती हूँ।

मैं भी बड़े होकर पँखो को फैलाकर,
खुले आसमान में उड़ना चाहती हूँ।
माँ-पापा तेरे आशाओं के आसमान में,
चाँद बन चमकना चाहती हूँ।

करके तेरा नाम रौशन,
तेरा हौंसला बनना चाहती हूँ।
माँ मैं भी जीना चाहती हूँ।
Written by- Nidhi Agarwal

आईये हम सब मिलकर संकल्प ले, आज से और अभी से, अपनी बेटियों के प्रति ऐसी कठोर भरी मानसिकताओं को बदले, ताकि उनको भी जीवन में आगे बढ़ने का मौका मिले, उनको भी कुछ कर दिखाने का मौका मिले।आइये हम सब मिलकर समाज में परिवर्तन लाए, जिससे धरती पर हमारा अस्तित्व बना रहे और यह "नन्ही कलियाँ" फूल बनकर खिले और आपके घर-आँगन को महका सके।

Must Read: बेटियों पर कुछ कविताएँ | Short Poems on Daughters in Hindi

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Edited by- Somil Agarwal

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