Wednesday, 7 October 2020

कोरोना वायरस पर कविताएँ | Poem on Coronavirus in Hindi

वर्तमान समय में पूरी दुनिया एक ऐसे संकट से गुजर रही है जिसकी हम मानवजाति ने कभी कल्पना भी नही की होगी। कोरोना वायरस जैसी घातक बीमारी ने हम मानवजाति को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। ढेरों लोग अब तक की इस बीमारी के चपेट में आ चुके है और बहुतों ने तो इस बीमारी के चपेट में आकर अपनी जान गवा दी। आज हमारा प्यारा भारत देश भी इस अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। यह वैश्विक महामारी के चलते हम भारतवासी भी चपेट में आ रहे है।

आज हम आपके समक्ष शेयर करते है कुछ कोरोना वायरस पर कविताएँ जिससे कि आप सब इस वैश्विक महामारी के बारे में आसानी से समझ सकें। हमने यह कविताएँ बहुत ही आसान शब्दों में आपके समक्ष प्रस्तुत की है ताकि बड़े, बूढ़े व ख़ासकर बच्चे इन कविताओं को अच्छे से समझ सकें।

कोरोना वायरस पर कविताएँ | Poem on Coronavirus in Hindi


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Poem on Coronavirus in Hindi

Poem on Coronavirus in Hindi


ओ रे कोरोना !

ओ रे कोरोना तुम कब जाओगे ?
अपने कैक्टस से चेहरे से,
हमको कब तक डराओगे।

बहुत हो गए जुर्म तुम्हारे,
तुम्हारे उपकार से न जाने,
कितने हो गए भगवान को प्यारे।

जब से तुम जिंदगी में आये,
नरक भी हमको बेहतर लगे,
तुम्हारी कृपा की, हम क्या कहे आगे।

खुली हवा में अब तो मानों,
हमको तो है डर लगे,
मुँह ढक कर हम तो एकदम है भूत से लगे।

जहाँ देखो तहाँ कोरोना,
सब एक दूसरे से दूर है भागे,
तुम्हारे डर से हमने अपने सारे सुख चैन है त्यागे।

तुम्हारे आने से कोरोना,
ज़बान हमारी हम से रूठी,
स्वादिष्ट व्यंजन खाने की अब तो सारी आस है टूटी।

सारी मस्ती सैर सपाटा,
सब हमसे अब छिन गया है,
घर में बइठे-बइठे मन भी हम से रूठ गया।

ओ रे कोरोना कौन जन्म का,
तुम हमसे हो बदला लेते,
तुम हम सबको एकदिन चैन से फिर से क्यों रहने नही देते।

जब से कोरोना देखी शक्ल तुम्हारी,
किस्मत का हो गया सत्यानास,
नौकरी भी चली गई, अब न रही कोई आस।

कोरोना अब जल्दी से,
तुम कर लो अपना प्रस्थान,
हमको देदो अब तुम, स्वस्थ शरीर का दान।

अगर तुम ओ कोरोना,
कर दो इतनी दया महान,
युगों-युगों तक याद करेंगे तुम्हारा हम नाम।
- निधि अग्रवाल

कोरोना वायरस पर कविता


कोरोना काल

कोरोना के इस संकट काल ने,
हमें बहुत कुछ सिखाया है।

हमें हमारी जिम्मेदारी से,
फिर से अवगत कराया है।

भले इसने बहुत अपनों को दूर किया,
पर कुछ अपनों को अपनों से मिलाया है।

आधुनिकता के इस युग में, 
फिर से हमारी संस्कृति से परिचय कराया है।

प्रकृति से दूर हो रहे मानव को,
फिर से इसके करीब लाया है।

लोगों को इसने अपने-अपने,
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया है।

प्रदूषित हो रहे पर्यावरण को इसने,
फिर से स्वच्छ बनाया है।

दूर हो रहे हमारे बचपन को इसने,
फिर से हमें मिलाया है।

किस्से-कहानियों के संसार से,
फिर से इसने परिचय करवाया है।

खो रहे हमारे अस्तित्व को,
फिर से इसने बनाया है।

संघर्षों से कैसे लड़ना है,
इसने हमें बताया है।

भले ही ये हमारे जीवन में,
असंख्य परेशानियों को लाया है।

पर सकारात्मकता के साथ इसने,
जीना भी सिखलाया है।
- Nidhi Agarwal

Coronavirus Par Kavita


कोरोना पर कविता

नही घबराओं कोरोना से,
बस रखो अपना ध्यान,
रोज सवेरे प्रातः उठकर,
करो योग और व्यायाम।

तुलसी अदरक के काढ़े से फिर,
करो अपने खान-पान की शुरुआत,
खाओ ताजे फल और हरी सब्जियां,
और बरतो हरदम ऐतयात।

जब भी तुम घर से बाहर जाओ,
मुँह पर मास्क लगाओ,
किसी बाहरी चीज को तुम,
न हाथ लगाओ।

सोशल डिसटेनसिंग का बाहर,
करो हरदम तुम पालन,
अपने इस कर्तब्य का तुम,
न करो कभी उलंघन।

हो जाये सर्दी तुमको अगर,
या हो जाये बुखार,
बिन लापरवाही बरते,
तुरंत करो उपचार।

इसके साथ-साथ ही,
रखो स्वकच्छता का खास ध्यान,
तभी रह सकोगे स्वस्थ तुम,
और रही बचेगी अपनी जान।

इन सबसे जायदा भी दोस्तों,
जरूरी है एक काम,
अपने साथ-साथ तुम,
रखना औरों का भी ध्यान।

तभी हो सकेगा संभव,
जन-जन का कल्याण,
बचेगा तभी जीवन,
हम सब और ये संसार।
- निधि अग्रवाल

हमें आशा है की आपको यह Poem on Coronavirus in Hindi से कुछ सीख अवश्य मिली होगी। अतः आप सब अपने घरों में रहकर, लॉकडाउन के नियमों का पालन कर अपना सहयोग निष्ठापूर्वक दें, ताकि जो-जो योद्धा इस कोरोना की जंग में तत्पर है उसे कोई कठनाई न हो। अगर आपको यह कविताएँ अच्छी लगी हो तो इन्हें शेयर अवश्य कर दें, नीचे उपलब्ध सोशल मीडिया बटन्स के जरिये, जिससे कि दूसरों को भी इनसे कुछ ज्ञान मिल सके।

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